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शनिवार, 24 जनवरी 2015

जय माँ सरस्वती

 समस्त मिथिला वासी के बसन्त पँचमीक   (सरस्वती पूजन)  हार्दिक शुभकामना ||||||||||||||||||||||||||||
आरती
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जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता|
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता||
मैया जय सरस्वती माता
चंद्रवदनी पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी |
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी ||
मैया जय सरस्वती माता
बाएं कर में वीणा, दायें कर माला |
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला ||
मैया जय सरस्वती माता
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया |
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ||
मैया जय सरस्वती माता
विद्या ज्ञान प्रदायिनी, जग में ज्ञान प्रकाश भरो |
मोह और अज्ञान तिमिर का, जग से नाश करो ||
मैया जय सरस्वती माता
धुप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो |
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो ||
मैया जय सरस्वती माता
माँ सरस्वती की आरती, जो कों जन गावे |
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे ||
मैया जय सरस्वती माता

सरस्वती माता कि      जय
जय माँ सरस्वती

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II श्री सरस्वत्यै नमः II

II श्री सरस्वत्यै नमः II
ॐ शुक्लांब्रह्मविचारसार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं I वीणापुस्तक धारिणींमभयदां जाड्यान्ध्कारापहाम् II हस्तेस्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मसनेसंस्थितां I वन्देतांपरमेश्वरींभगवतीं बुद्धिप्रदाम शारदाम् II

माछक महत्व


हरि हरि ! जनम कि‌ऎक लेल ?
रोहु माछक मूड़ा जखन पैठ नहि भेल ?
मोदिनीक पल‌इ तरल जीभ पर ने देल !
घृत महँक भुजल कब‌इ कठमे ने गेल !
लाल-लाल झिंगा जखन दाँ तर ने देल !
माडुरक झोर सँ चरणामृत ने लेल !
माछक अंडा लय जौं नौवौद्य नहि देल !
माछे जखन छाड़ि देब, खा‌एब की बकलेल!
सागेपात चिबैबक छल त जन्म कि‌ऎ लेल !
हरि हरि.



पग पग पोखैर पान मखान , सरस बोल मुस्की मुस्कान, बिद्या बैभव शांति प्रतिक, ललित नगर दरभंगा थिक l

कर भला तो हो भला अंत भले का भला

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